आमतौर पर चुनावी सभाओं में वोट दिलाऊ या जिताऊ समीकरण बनाने वाले नेताओं की मांग रहती है, पर 1991 के लोकसभा एवं विधानसभा के चुनावों में राजनीतिक सत्ता पर धर्मसत्ता का जबर्दस्त प्रभाव दिखा। सियासी किरदारों से ज्यादा संत व मौलाना सक्रिय दिखे।
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